क्या भारत की राजनीतिक बातचीत अत्यधिक ध्रुवीकृत होती जा रही है?

Date & Author :

जून 4, 2025
. By Columnist: John

परिचय :

राजनीतिक बहसें पहले मुद्दों पर होती थीं — अब वे अक्सर पहचानों पर केंद्रित हो जाती हैं। हमने सूक्ष्मता कहाँ खो दी?

मुख्य भाग:

    पृष्ठभूमि:

    • टीवी बहसों से लेकर ट्विटर तक, मध्यमार्ग लुप्त होता जा रहा है।

    तथ्य:

    • प्यू डेटा से पता चलता है कि 60% भारतीय युवाओं का मानना है कि राजनीतिक चर्चाएं शत्रुतापूर्ण होती हैं।

    विश्लेषण:

    • पक्षपात सिर्फ संसद तक ही सीमित नहीं है - यह परिवारों और मित्रता में भी व्याप्त है।

    प्रतिबिंदु:

    • ध्रुवीकरण मतदाताओं को लामबंद कर सकता है और विकल्पों को स्पष्ट कर सकता है - लेकिन किस कीमत पर?

    निष्कर्ष:

    • लोकतंत्र संवाद से पनपता है, विभाजन से नहीं। हमें पुलों का पुनर्निर्माण करना होगा।

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