वैश्वीकृत दुनिया में सांस्कृतिक साक्षरता आज भी क्यों महत्वपूर्ण है
वैश्विक बनने की दौड़ में क्या हम अपनी सांस्कृतिक बुनियाद खो रहे हैं?
मुख्य भाग:
पृष्ठभूमि:
- अंग्रेजी का बोलबाला है, लेकिन क्षेत्रीय भाषाएं और कला-रूप भुलाये जा रहे हैं।
तथ्य:
- पिछले 50 वर्षों में भारत ने 220 से अधिक बोलियाँ खो दी हैं।
विश्लेषण:
- सच्चे वैश्विक नागरिक वे हैं जो समझते हैं कि वे कहां से आये हैं।
प्रतिबिंदु:
- कुछ लोग तर्क देते हैं कि स्थानीय संस्कृति का विकास होना चाहिए या फिर लुप्त हो जाना चाहिए।
निष्कर्ष:
- हमें आधुनिकीकरण करना ही होगा - लेकिन सांस्कृतिक विनाश की कीमत पर कभी नहीं।