आचार्य अभिनवगुप्त सहस्राब्दी समारोह समिति द्वारा आयोजित अभिनव समागम संपन्न

‘अभिनव गुप्त का दर्शन विविधता में एकता का परिचायक है’- डॉ मोहन भागवत

‘अभिनव गुप्त के ज्ञान और समाज के प्रति दर्शन पर कहा कि भाव और ज्ञान सापेक्ष नहीं होता, वर्तमान की हमारी संस्कृति इसका विशेष उद्धरण है।’- श्रीश्री रविशंकर


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