एनआईटी के छात्रों की आवाज बना जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र

10 अप्रैल 2016

एनआईटी श्रीनगर में चल रहे मुद्दे को लेकर जहां एक ओर रानैतिक पार्टियां अपनी-अपनी रोटियां सेकने में लगी हुई है तो वहीं दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र उन छात्रों की आवाज बनकर मीडिया के सामने आया है जो वहां कैंपस में डर के साये में जी रहे है और अपने घर वापिस आना चाहते हैं। जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र की निदेशक आभा खन्ना ने जी न्यूज पर आकर पूरे देश के सामने एनआईटी श्रीनगर के छात्रों की आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि नेता लोग एक-दूसरे को गलत और सही साबित करने में लगे हुए हैं पर उन छात्रों के बारे में कोई नहीं सोच रहा जो एस समय एनआईटी कैंपस में फंसे हुए है और जल्द से जल्द अपने घर लौटना चाहते हैं। उन छात्रों का दोष मात्र इतना है कि उन्होंने अपने राष्ट्रध्वज का सम्मान किया और कैंपस में उसको सही स्थान पर लगाया। इस दोष के कारण एनआईटी का प्रशासन भी उन्हें बार-बार घमकियां दे रहा है। ऐसी स्थिति में राजनैतिक पार्टियों को चुनावी खेल खेलने की बजाए, छात्रों के भविष्य और उनकी सुरक्षा के बारे में सोचना चाहिए।

देश की मीडिया और नेता चाहे बेशक उन छात्रों पर ध्यान नहीं दे रहे, पर जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र निरंतर उनके साथ खड़ा है। देश के अन्य राज्यों के जो भी छात्र इस समय एनआईटी में पढ़ रहे हैं और देशभक्त होने के कारण कॉलेज प्रशासन और जम्मू-कश्मीर पुलिस की प्रताड़ना को झेल रहे अध्ययन केंद्र आज उनकी आवाज बनकर उनके साथ है। लगातार छात्रों और उनके अभिभावकों से भी संपर्क किया जा रहा है। हर संभव तरीके से छात्रों की सहायता भी की जा रही है। यह अपने आप में एक विडंबना ही है कि जो छात्र कल देश का भविषय संवारने वाले हैं आज उन्ही का भविष्य खतरे में है। कॉलेज कैंपस में तिरंगा फहराने और भारत माता की जय बोलने को अपराध मानकर एनआईटी प्रशासन छात्रों को फेल करने की धमकी दे रहा है। यहां तक की छात्राओं को भी प्रताड़ित किया गया है। ऐसी परिस्थिति में अगर सरकार और मीडिया उचित कदम नही उठाती है छात्रों को न्याय नहीं मिलता है तो भी जम्मू-कश्मीर अधय्यन केंद्र छात्रों की हर तरह से सहायता करेगा और उनकी आवाज को दबने नहीं देगा।