इतिहास ने महाराजा हरिसिंह से किया अन्याय – आशुतोष


इतिहास ने जितना अन्याय जम्मू कश्मीर के अंतिम महाराजा हरि सिंह के साथ किया उतना शायद किसी अन्य के साथ न किया हो। इस विषय पर जितना लिखा गया बोला गया शायद ही भारत की किसी भी रियासत को लेकर इतना हो हल्ला मचा हो। उन्होंने कहा कि जब किसी विषय पर जरुरत से ज्यादा लिखा, बोला या कहा जाये, स्वभाविक ही संदेह होता है कि या तो सच्चाई को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है या विषय को उलझाने का, जिससे सत्य तक पहुंचना मुश्किल हो जाये। ऐसा ही कुछ महाराजा हरि सिंह और जम्मू कश्मीर को लेकर हुआ जम्मू-कश्मीर अध्ययन केन्द्र के निदेशक आशुतोष भटनागर ने कहा।

आशुतोष भटनागर ने कहा, ‘जम्मू कश्मीर में जो कुछ हो रहा था, उसके लिये किसी न किसी को अपराधी ठहराना जरुरी था, ताकि इतिहास का पेट भरा जा सके। इसके लिये महाराजा हरि सिंह से आसान शिकार और कौन हो सकता था, खासकर उस समय, जब उनके अपने भी उनका साथ छोड़ कर सत्ता के साथ मिल गये हो।’

जम्मू कश्मीर के शरहदों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। महाराजा हरि सिंह को यदि सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करनी है तो जम्मू-कश्मीर को उसी रूप में स्थापित किया जाये, जिस रूप में महाराजा छोड़ गये थे। उक्त बातें जम्मू काश्मीर पीपल्स फोरम द्वारा आयोजित महाराजा हरि सिंह के जयन्ती समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कही।

दीन दयाल शोध संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि डॉ. जितेन्द्र ने कहा, ‘हरि सिंह का नाम इसलिए इतिहास में नहीं आया क्योंकि आजादी के बाद भारत के इतिहास लेखन का काम एक खास परिवार के इशारों पर चल रहा था। उन्होंने कहा कि महाराजा हरि सिंह एक दूरदर्शी सोच के व्यक्तित्व थे। उन्होंने अपने शासन काल में राष्ट्र और समाज के हित में कई ऐतिहासिक फैसले लिए। स्वास्थ्य का क्षेत्र हो या शिक्षा का क्षेत्र, महाराजा द्वारा किये गये कार्य आज भी उनकी जनता के प्रति उनकी न्यायप्रियता को दर्शाता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाराजा हरि सिंह के पौत्र व एमएलसी अजातशत्रु ने कहा कि हरि सिंह का नाम राज्य के उन शासकों में आता है जिन्होंने अपने प्रगतिशील दृष्टिकोण के कारण राज्य में अनेक सुधार किये। महाराजा हरि सिंह ने राज्य में दलित समाज के लिये मंदिरों के दरवाज़े उस समय खोल दिये थे, जब अन्य रियासतों में इसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। अजातशत्रु ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि व केन्द्रीय मन्त्री के रूप में उपस्थित डॉ. जितेन्द्र सिंह से महाराजा हरि सिंह को भारत रत्न देने व जम्मू एयरपोर्ट का नाम महाराजा हरि सिंह के नाम पर रखने की मांग की।

कार्यक्रम का संचालन महेन्द्र मेहता ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप एमडीएच के चेयरमैन महाशय धर्मपाल, स्वदेश रत्न, राजीव तुली जी सहित की गणमान्य लोग उपस्थित थे।

 

अवनीश राजपूत