(अमर उजाला) अलगाववाद‌ियों की इस सच्चाई को पढ़कर चौक जाएंगे आप

जुमे के दिन ही धरना प्रदर्शन करने के अलगाववादियों के कदम को जम्मू कश्मीर में उनके कमजोर हो रहे आधार के रूप में देखा जा रहा है।

जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र के निदेशक आशुतोष भटनागर का कहना है कि इज्जत बचाने के लिए अलगाववादी नेता अपना प्रदर्शन जुमे के दिन (शुक्रवार) आयोजित करते हैं ताकि नमाज की भीड़ का सहारा लेकर फायदा उठाया जा सके।

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह का भी मानना है कि सूबे में अलगाववाद की जड़े सूख रही हैं। अलगाववादियों का असर महज कश्मीर के 5 जिलों तक सीमित रह गया है।

उनका कहना है कि सूबे की जनता का विश्वास अलगाववादियों पर से उठ चुका है, इसलिए अपनी पहचान बनाए रखने के लिए वे अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं लेकिन इसका असर जमीन पर नहीं है।

जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र सूबे की सियासी गतिविधियों पर पल-पल की नजर जमाए हुए है। केंद्र के निदेशक आशुतोष का कहना है कि अलगाववादी नेता ऐसे अवसर तलाशते हैं जहां भीड़ हो। लगातार ऐसे कई मामले देखने में आए हैं जब अलगाववादियों ने नमाज के दिन ही धरना और प्रदर्शन किए।

अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने भी शुक्रवार को ही पाक हितैषी नारे लगाने के साथ पाक का झंडा लहराया था। इससे पहले मसर्रत ने भी अपना प्रदर्शन शुक्रवार को ही रखा था। भारत सरकार का खुफिया विभाग भी अलगाववाद की इस सच्चाई को कबूल करता है।

खुफिया सूत्रों का कहना है कि नमाज की भीड़ की आड़ का लाभ उठाते हुए अलगाववादी नेता पुलिस और सुरक्षा बलों को कार्रवाई के लिए उकसाते हैं ताकि वे अपने मकसद को जनता की मांग बता सकें।

 

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